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मैंने उसकी चूचियां चूस चूस कर दबा दबा कर पूरी लाल कर दी थी| फिर वो बोली मामा दर्द होने लगा अब तो छोड़ो आगे का काम करो

पिताजी के तीन और भाई थे.. सब अच्छी पढ़ाई और तरक्की की वजह से अच्छे दिन देख रहे थे। पिताजी पढ़ाई में उतने होशियार और तेज नहीं थे.. ऊपर से बचपन से ही उनमें आत्मविश्वास और खुद्दारी की कमी थी.. धीरज और कर्मठता कम थी। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन मन में गुदगुदी भी हुयी. कौन ऎसी १५ साल की लड़की होगी जिसे दुलहन का श्रंगार करना अच्छा न लगता हो? मैं भी मान गई.

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ससुर बोला – कोई बात नहीं, बेटा… लाइट चालू ही रखेंगे नहीं तो तुम्हारी सास का छेद ढूँढने मे तकलीफ़ होगी…

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उम्म्म..म्मथम्म....अगर में तुम्हे एक मौका दे दूं जिसका तुमने आज तक सिर्फ़ सपना ही देखा है.....अगर तुम्हे वाकई में अपनी मम्मी चोदने को मिल जाए तो...... रश्मि बड़े ललचाने वाले अंदाज़ में अपने होन्ट चाटते हुए पूछती है.

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