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झी टॉकीज लाईव्ह कार्यक्रम

झी टॉकीज लाईव्ह कार्यक्रम, तो वो थोड़ा सा लजा गई और मुस्कान छोड़ते हुए बोली- सॉरी राहुल.. अगर तुम्हें मेरी वजह से कोई दुःख हुआ हो तो.. और वैसे भी जब तुमने सच मुझे बताया था.. तो मैं खुद भी अपने आपको कोस रही थी.. अगेन सॉरी.. जब मुझे यह अहसास हुआ कि अब मैं खुद को और देर नहीं रोक पाऊँगा.. तो मैंने उसके सर को पकड़ा और तेज़ स्वर में ‘आह्ह आआअह्ह्ह्ह आआह जानू.. बस ऐसे ही करती रहो.. थोड़ा और सहो.. मेरा होने वाला है बस..’ और देखते ही देखते मेरे वीर्य निकालने के साथ-साथ मेरी पकड़ ढीली हो गई।

यह सुन कर आंटी आईं और बोलीं- सॉरी बेटा.. मैं तो जल्दी में भूल ही गई थी.. तुम बस 1 मिनट ठहरो.. मैं अभी तुम्हारे लिए कुछ लाती हूँ। मैं मादकता से बोली- मैं तो आपके बाबूराव की दासी हूँ.. मैं तो आपके इस मस्त बाबूराव से चुदने के लिए राण्ड भी बन जाऊँगी.. आपकी रखैल भी बनूँगी.. आज मुझे ऐसा चोदो.. कि मेरी जिस्म का पोर-पोर दु:खने लगे.. पर जल्दी चोदो.. कहीं ह्ज्बेंड या कोई और आ ना जाए।

अब गाने वगैरह लिखने की शायद जरूरत नहीं है.. आप लोग बुद्धिजीवी हैं.. सब समझ ही लेंगे और अगर लिखता भी हूँ तो कुछ को यही लगेगा कि फालतू की समय बर्बादी हो रही है.. इसलिए अब कहानी आगे बढ़ाता हूँ। झी टॉकीज लाईव्ह कार्यक्रम तान्या ने कुछ देर और लिंग को सुक किया और फिर मेरे दोनों तरफ पैर करके नीचे बैठने लगी। लिंग के पास आकर उसने लिंग को योनि पर सैट किया और आराम से नीचे होती गई। कुछ ही पल में उसकी योनि ने पूरे लिंग को निगल लिया और जकड़ लिया।

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  1. तभी रजनी फिर ठाकुर की गोद मे बैठ गयी और अपनी गंद ठाकुर के लंड पर रगड़ने लगी. उसे लगा की ठाकुर के लंड मे कुछ जान आ रही है. पर वो जानती थी की ठाकुर का लंड ज़्यादा देर तक टिकने वाला नही था.
  2. मैं बहुत ही घबरा गया कि अब मैं क्या जवाब दूँगा अगर कहीं कुछ हो गया सोचते-सोचते मेरे शरीर में पसीने की बूँदें घबराहट के कारण बहने लगीं। 12358 कोलकाता अमृतसर
  3. लगभग एक घंटे मे पोलो मैदान के दो चक्कर पूरे हो गये. इस बीच मधुलिका घोड़े को हल्के हल्के दौड़ाया भी और रणबीर के बताए तरीके से उसे थप़ थपा के रोका भी. मधुलिका बहोत खुश थी. तान्या ने अपना हाथ हमारी जांघों के बीच में डाल दिया और उसका हाथ मेरे लिंग को पकड़े हुए सोनल के हाथ से जा टकराया जो मेरे लिंग की जड़ों को छूने लगा। दो दो लड़कियों के हाथों को अपने लिंग पर महसूस करते ही मेरे लिंग ने स्वागत में दो बूंदे रस टपका दिया जो सोनल के हाथ पर लगकर गुम हो गया।
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  5. पहले चुंबन के बाद कुछ ही क्षणों में दूसरा होता , दोनो एक एक गाल पर. ये कृत्य उसके लिए एक अलार्म की भाँति दिमाग़ में बस गया था. बातों के दौरान ही मुझे नवीन ने बेड पर बैठाकर मेरी कुर्ती और लैगी को निकाल दिए थे और मैं पैन्टी और ब्रा में बैठी चूची और चूत मसलवा रही थी।

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फिर जब उसे हुक की रगड़ से होश आया तो मुझसे बोली- राहुल जाओ.. जल्दी जाकर नहा लो.. ये लोग अभी आते ही होंगे।

उसने अपने हाथों को झटका दिया, मैंने ढीला पकउ़ा हुआ था इसलिए उसके हाथ छुट गये। उसने अपने हाथ मेरी कमर पर रख दिये और शर्ट को उपर करके मेरी कमर को बुरी तरह सहलाने लगी। ये कहते हुए उसने अपना हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया और मेरी आँखों में देखते हुए मुझसे बात करते-करते मेरे लौड़े को मुठियाने लगी।

झी टॉकीज लाईव्ह कार्यक्रम,तो मैं बिना बोले ही रूचि की आँखों में आँखे डालकर शांत होकर देखने लगा.. जिससे उसे ऐसा लगा.. जैसे मैं उससे ही पूछ रहा होऊँ कि मैं आऊँ या न आऊँ..

मरवाउंगी, अरे जब उसे पता चलेगा कि उसके आने से पहले यहां क्या चल रहा था, तो उसकी चूत गीली हो जायेगी, और तेरा ये मोटा लंड लेने के लिए तड़पने लगेगी, सोनल ने खड़े होते हुए मेरे लिंग को अपनी योनि पर रगड़ते हुए कहा और अपने हाथ मेरी गर्दन में डाल कर मेरे होंठों पर एक किस ली।

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इतनी प्यारी संरचना को देखकर मैं तो मंत्रमुग्ध हो गया था.. जिससे मुझे कुछ होश ही नहीं था कि मैं कहाँ हूँ.. कैसा हूँ। मैंने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए अपनी भी गति बढ़ा दी और अब मेरा पूरा ‘सामान’ बिना किसी रुकावट के.. उसको दर्द दिए बिना ही आराम से अन्दर-बाहर होने लगा।

उसके होंठों को चूसते हुए मैं खड़ा हो गया। खड़े होते ही मेरी जींस घुटनों पर आकर टिक गई। मैंने पैरों को हिला हिलाकर जींस को पैरों से अलग कर दिया और अपने हाथ नीचे ले जाकर उसकी जींस को नीचे सरकाना शुरू कर दिया।

मेरी नजर उसपर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी, सोनल चलते हुए मेरे पास आई और मेरे गालों पर उंगली फिराती हुई रसोई में चली गई।,झी टॉकीज लाईव्ह कार्यक्रम मेरे इतना बोलते ही माया ने अपनी आँखें खोल दीं और प्यार भरी निगाहों से देखते हुए बोली- जान आई लव यू सो मच.. मुझे तुम्हारी बाँहों में बहुत सुख मिलता है.. मेरा बस चले तो मैं इन्हीं बाँहों में अपना सारा जीवन बिता दूँ।

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