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चेहऱ्यावर पिंपल्स का येतात

चेहऱ्यावर पिंपल्स का येतात, फिर माँ ने अपनी बेटी को थोड़ा प्यार दिया और चली गई । आंटी के जाने के बाद परिधि ने मुझे देखा और बोली.... क्यों बाबू जेंटलमैन क्या इरादा है दिल्ली तो आज घायल होने वाला है । लाला ने आगे बढ़कर उसे अपने कलेजे से लगा लिया, और आशीर्वाद देते हुए बोले – जीता रह बेटे, आज दूसरी बार तूने इस घर की बेटी की रक्षा करके जता दिया, कि तू कितना महान है…

सभी लड़कियाँ साड़ी में थी क्योंकि यह उनका ड्रेस कोड था , और दूसरी की तीनों बहुत ही चंचल थी जो मेरा रैगिंग लेने आई थी । हाँ रैगिंग ही कह सकते है क्योंकि उनके सवाल और व्यंग तो कुछ इस प्रकार ही थे । सामने से अपनी माँ के नग्न शरीर पर नज़र पड़ते ही शंकर अपने लंड का दर्द भूलकर उसके यौवन में खो गया, उसका मुँह खुला का खुला रह गया…….,

दे-दनादन अनगिनत राउंड उसकी एके-47 से निकलते चले गये…, जब उसकी पूरी मॅगज़ीन खाली हो गयी तब जाकर उसका लंड शांत हुआ…! चेहऱ्यावर पिंपल्स का येतात अबतक कार से सब उतर आये थे कार के पास अब ट्रैफिक बढ़ रही थी फिर परिधि ने सबको कार में बैठने को कहा मगर मैं अभी इस हालत में नहीं था की किसी से कुछ बोल पाऊं या दिया के साथ बैठ कर जाऊ, इसलिए मैंने परिधि से कहा की सब को वॉटरफॉल से घुमा लाओ मैं कॉफ़ी शॉप मैं इंतज़ार करता हू ।

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  1. अपने शरीर को हिलते देख माला की आँख खुल गयी. राणाजी जैसे उसे बेड पर लिटा कर हटे तो वो एकदम से हडबडाई और पलंग से उतर कर खड़ी हो गयी. आँखों में थोडा सा डर था. राणाजी उसकी तरफ देख थोडा मुस्कुराये और बोले, अरे नींद आ रही है तो सो जाओ. ऐसे क्यों डर गयीं? क्या मुझ से डर लगता है तुमको?
  2. परिधि अब बोले तो क्या बोले मुझे इन तीनो की मुलाकात याद आ गई।की कैसे तीनो ने प्लान करके मेरी क्लास लेने आई थीं। जो सक्सेस नहीं हो पाई।पर आज इन तीनो ने हम दोनों को ही घेर रखा था। બીપી પીચર સેકસી
  3. लेकिन बजाय बैठने के वो और ज़्यादा तन्तनाने लगता, दबाते-दबाते उसके लंड में ऐंठन सी होने लगी, उसका मन करने लगा कि यहीं क्लास में ही इसे बाहर निकल कर खूब ज़ोर ज़ोर्से हिलाए.. में।।।।। ओके बोल, और ऋषभ वंहा से चला गया। में वंही ग्राउंड में सीढ़ियों पर बैठ गया और कल के बारे में सोचने लाग। हाँ थोड़ा मायूस जरूर था पर दिल तो दिल है जुदाई का भी गम था, बहुत प्यार जो करता हूँ मैं अपनी परिधि से।
  4. चेहऱ्यावर पिंपल्स का येतात...शंकर ने ना चाहते हुए अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया, फिर उसके रूई जैसे मुलायम कूल्हे को सहलाते हुए बोला – अभी आप यहाँ से चलिए, यहाँ कोई भी आ सकता है…! हम एक दूसरे की भावनाओं में बहते चले गए, हमारे प्यार के आंसू हमारे आंखों से छलक चुके थे और दिल को एक असीम सुकून की प्राप्ति हो रही थी।
  5. दर्द से मे अंदर ही अंदर छ्ट-पटा रही थी, मेरी आँखों से पानी निकल रहा था…, लेकिन उन्होने मुझ पर कोई रहम नही किया, और धीरे-धीरे अपने खूँटे को अंदर-बाहर करने लगे… मानिक भी तेज कदमों से उसकी तरफ बढ़ चला. मानिक के अपने पास आते ही वो उससे बोली, तुम्हें 'वो बुला रहे हैं. कुछ बात करनी है.

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रंगीली ने उसके सिर को उपर उठाया, कुछ देर अपनी वासना से भरी नशीली आँखों से उसे देखती रही, फिर एक झटके से उसने अपने बेटे के होंठों पर अपने तपते होंठ रख दिए…!

मैं 2 दिनों के लिए अपने अंकल के पास जा रही हूं । बहुत दिन पहले से प्लान था उनके पास जाने का इसीलिए जाना पड़ा । सुबह मैं आई थी तुमसे मिलने पर तुम शायद मोर्निंग वाक पर गए थे । इसीलिए मुलाकात नहीं हो पाई । फिर क्या था, उन 5-6 लड़कों ने उनकी धुनाई शुरू करदी, कल्लू के वो दोनो गान्डु यार अपनी दुम दबाकर खिसक लिए, और उन लड़कों ने चूतिया कल्लू को वही ज़मीन पर पटक कर दे लात दे घूँसा बना दिया भूत…

चेहऱ्यावर पिंपल्स का येतात,बेड पर आपकी मुनिया का रस अच्छे से पीने नही मिलता, ये कहते हुए उसने उसके ब्लाउस और ब्रा को भी एक तरफ उछाल दिया..!

सुषमा की चीख सुनते ही शंकर के हाथ पैर वहीं रुक गये, जिसका फ़ायदा उठाकर उनमें से दो लोगों ने उसे आजू-बाजू से पकड़ लिया..,

खैर इसी तरह समय गुजर रहा था…! और शंकर इस कच्ची उमर में ही लगभग 6 फीट लंबा, 40 का मजबूत कसरती सीना हो गया था उसका,સેક્સ કરવાની રીત

सेठ जी की बात सुनकर उसकी साँस में साँस आई, और एक लंबी गहरी साँस छोड़ते हुए बोला – तो फिर बताइए सेठ जी ये ग़रीब आपकी क्या सेवा कर सकता है.. और जब दिल भर जाता है, हवस शांत हो जाती है तब हम जैसी औरतों को आप चूसे हुए आम की गुठली की तरह कूड़े करकट में फेंक देते हो..!

सेठानी – उससे क्या पुछते हो, वो तो अपने आप को बचाने के लिए कोई भी कहानी गढ़ेगा ही, मे पुछति हूँ इसने कल्लू पर हाथ उठाया तो उठाया कैसे…?

भोला ने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – तभी तो पूरा मज़ा देता है मेरी रानी, अब ले मज़े इसके…, ये कह कर उसने धीरे-धीरे अपने धक्के लगाने शुरू कर दिया…!,चेहऱ्यावर पिंपल्स का येतात माला हाथ में पानी का खाली गिलास लिए खड़ी इन दोनों को जाते हुए देख रही थी. राणाजी अपनी नजर झुका कर सोचते हुए चल रहे थे. मानिक का मन हुआ कि एक बार माला को मुड़कर देख ले और जैसे ही उसने मुड़कर देखा तो माला उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा पड़ी. मानिक को भी बहुत आनंद आया.

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